पौधारोपण की विधि और सही देखभाल

पौधारोपण की विधि और सही देखभाल

समस्या

हमारे कुछ किसानों नए बताया कि जब से उन्होंने पौधे लगाए है उसके 6 महीने से 2 साल बाद तक भी कोई खास प्रगति नहीं हुई। पौधों का अध्ययन करने के पश्चात निम्न समस्याएं सामने आई –

  • पौधों सही प्रकार बढ़ नहीं रहे है,
  • कुछ पौधों के पहले पत्ते झड़ जाते है और फिर धीरे धीरे पौधे सूख जाते है।

हम यहां पर जो उर्वरक और दवाई बताई गई है वह सब रासायनिक है और रासायनिक बाग़वानी के लिए ही उपयुक्त है।

सुझाव

किसानों से बात करने और इनकी समस्याओं का अध्ययन करने के बात यह बात सामने आई कि अधिकतर किसान पौधे लगते समय समुचित और सही खाद, पानी आदि का प्रबंध नहीं करते।

अपने अनुभव के आधार पर हम यह बताना चाहेंगे कि अगर आप ने नींबू कि बाग़वानी करने का निश्चय किया है तो ड्रिप अवश्य लगाए।

इसलिए हमारा सुझाव है कि पौधे लगते समय प्रत्येक गढ्ढे में यहां बताई गई खाद और दवाई अवश्य डाले –

  1. लगभग 10 किलो अच्छी सड़ी हुई गोबर कि खाद या बकरी कि मिंगन। अगर आपके पास मिंगन है तो वह कम से कम 1 साल पुरानी हो। खाद को अच्छी तरह सड़ाने के लिए वेस्ट डिकंपोजर (Waste Decomposer) का प्रयोग कर सकते है। यह खाद को जल्दी सडाती है और क्वालिटी भी अच्छी होती है।
  2. 100 ग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP)। यह एक रासायनिक उर्वरक है दो दानेदार होता है। इसमें 16% फास्फोरस, 11% सल्फर और 14% कैल्शियम और अन्य मिनरल्स होते है। यह सल्फर कि कमी को भी पूरा करता है जो पौधे की जड़े विकसित करने में सहायक होता है।
  3. 10 ग्राम फफूंदनाशी (Fungicide)। यह बाजार में कई नामों से मिलता है इसलिए आप कॉपर ऑक्सी क्लोराइड (COC) अथवा बाविस्टिन (Carbendazim) अथवा SAAF (Carbendazim 12% + Mancozeb 63%) में से कोई भी एक ले सकते है।
  4. 5 ग्राम Chlorpyrifos या Thimet यह मिट्टी में दीमक और अन्य हानिकारक कीटों से पौधे की रक्षा के लिए है। इनमें से कोई भी एक ले। यह पाउडर के रूप में आता है।

प्रयोग की विधि

प्रत्येक गढ्ढे से को मिट्टी निकली है उसमें ऊपर बताई गई चारों चीजें अच्छी तरह मिला ले। अब इसे गढ्ढे में भर दे। अब गढ्ढे में पौधे की पॉलीथीन से थोड़ी बड़ी जगह बनाए और थैली की पॉलीथीन हटाकर इसमें पौधा रखकर चारों ओर कि मिट्टी को अच्छी तरह दबाए।
अब पौधे के तने के चारों ओर लगभग एक फुट चौड़ा थाला बनाए। अब इसमें कम से कम 5 लीटर या इतना पानी से कि थैली और ज़मीन कि मिट्टी एक हो जाए।

सिंचाई प्रबंधन

यह ध्यान रखना है कि शुरू के तीन से चार महीने छोटे पौधों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते है। इसलिए इनमें थोड़ी नमी हमेशा रहनी चाहिए क्योंकि पहले दो माह में पौधों की जड़ें विकसित होती है। गर्मी के मौसम में हर दूसरे या तीसरे दिन ड्रिप से पानी दें। बरसात में आवश्यकता अनुसार ड्रिप चलाए। दो माह तक आपको यही करना है।

लगभग 15 दिन बाद प्रत्येक पौधे के तने के चारों ओर 4 से 6 इंच दूर तक थोड़ी मिट्टी चढ़ा दे। इससे पौधे का तना पानी से बचा रहेगा और कई बीमारियों से भी।

दो महीने बाद

दो से ढाई महीने बाद आप देखेंगे कि पौधों ने जड़े पकड़ ली है और उनमें नई पत्तियां निकलने शुरू हो गई है। अब आप उनमें खाद लगाए। प्रत्येक पौधे के लिए इतनी खाद कि आवश्यकता होगी।

  1. पोटाश (Potash) 20 ग्राम। इसे Muriate of Potash (MOP) भी कहते है। यह पौधों के तीन अतिआवश्यक तत्वों में से एक है जो स्वस्थ पौधों और फलों के लिए आवश्यक है।
  2. यूरिया (Urea 49%) 20 ग्राम। यह एक रासायनिक खाद है जो सफेद दानेदार रूप में मिलता है। यह नाइट्रोजन की कमी को पूरा करता है।

खाद लगाने की विधि

प्रत्येक पौधे के लिए ऊपर बताई गई मात्रा के दोनों खाद को मिला ले। पौधे के तने से चारों ओर छह इंच छोड़कर एक फुट चौड़ाई में यह खाद डाले और अच्छी तरह मिट्टी में मिला दे और फिर पानी दे।

संदर्भ

अमेजिंग किसान ग्रुप में नींबू की बाग़वानी करने वाले अनुभवी किसान नावेद शेख द्वारा सुझाए गए उपायों पर आधारित।

डाउनलोड करें

*************

Disclaimer: इस लेख में बताये गए सभी उपाय विभिन्न किसानों द्वारा अपनाई गई सफल विधियों पर आधारित हैं परन्तु इनकी वैज्ञानिक पुष्टि हमारे द्वारा नहीं की जा सकती। पाठकों द्वारा किये जाने वाले प्रयोग हमारे नियंत्रण से बाहर है इसलिए अगर किसी का किसी कारण से कोई नुक़सान होता है तो ‘अमेजिंग किसान’ या लेखक इसके लिए जिम्मेदार नहीं होगें।