नींबू में गमोसिस

नींबू में गमोसिस (गोंद जैसा रिसाव) रोग

आपने कुछ फलदार पेड़ो और पौधों में उनकी टहनियों या तने से एक गोंद जैसा तरल पदार्थ निकलता हुआ अवश्य देखा होगा। यह भूरे अथवा हलके लाल रंग का होता है। यह जिस जगह से निकलता है वहां पर छाल खुरदरी या फटीं हुई होती है। यह पौधे में एक नासूर की तरह होता है।छाल में पानी से भरे हुए गड्ढे बन जाते है जिनमे से दुर्गन्ध सी आने लगती है।

यह निम्बू वर्गीय पौधों में पाया जाने वाला गमोसिस (gummosis) रोग है जिसे जड़ सड़न या रुट रोट (root rot) भी कहते है। यह तने व टहनियों पर लगने वाली बीमारी है। रोग लगे पौधे से गोंद का निकलना ही इस का मुख्य लक्षण है। 

यह रोग महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, असम, पंजाब व राजस्थान के कई भागों में पाया जाता है। यदि समय पर रोग की रोकथाम न की जाए तो पौधा मर भी सकता है।

गमोसिस की पहचान 

यह पौधे के तने और टहनियों / शाखाओं पर लगने वाली बीमारी है। इसमें रोग वाले भाग से गोंद निकलना इसकी मुख्य पहचान है। सब से पहले रोग का असर पौधे के तने के निचले भाग पर ज़मीन से लगने वाले हिस्से के पास होता है। फिर चारों तरफ फैल कर नीचे जड़ व तने की तरफ बढ़ता है। जिससे छाल व लकड़ी दोनों प्रभावित होते हैं। बारिश के मौसम में गोंद पानी से धुल कर नीचे जाकर ज़मीन से मिल जाता है। 

यह पौधे के तने और टहनियों / शाखाओं पर लगने वाली बीमारी है। इसमें रोग वाले भाग से गोंद निकलना इसकी मुख्य पहचान है। सब से पहले रोग का असर पौधे के तने के निचले भाग पर ज़मीन से लगने वाले हिस्से के पास होता है। फिर चारों तरफ फैल कर नीचे जड़ व तने की तरफ बढ़ता है। जिससे छाल व लकड़ी दोनों प्रभावित होते हैं। बारिश के मौसम में गोंद पानी से धुल कर नीचे गिर जाता है और ज़मीन सेमिल जाता है इसलिए इसकी पहचान कठिन हो जाती है। गर्मी के मौसम में रोग लगे हिस्से पर गोंद सूखने के कारण इकट्ठा हो जाता है और इसकी पहचान आसानी से हो जाती है। इस बीमारी से रोग वाले भाग पर पहले छिलका फटता है और फिर सूख जाता है जिसके कारण फटीं हुई धारिया बन जाती है जिनमे से गोंद निकलता है।

अगर इस रोग का असर ज़मीन के अंदर जड़ पर होता है तो रोग के पहचान शुरू में दिखाई नहीं देती, लेकिन जड़ गलने से जड़ों का काफी हिस्सा गल जाता है। मुख्य तने व जड़ों पर इस रोग के असर से पेड़ सूखने लगता है। पेड़ के सूखने से पहले उन के ऊपर काफी फूल आते हैं, लेकिन फल छोटे बनते हैं और पकने से पहले गिर जाते हैं। रोग लगे पेड़ों की पत्तियों पर सूक्ष्म तत्त्वों की कमी के लक्षण भी दिखाई पड़ते हैं। पत्तियों की नसें पीली पड़ जाती हैं और वे पकने से पहले गिर जाती हैं। इस रोग का असर बिना पके, पकने वाले व पके फलों पर भी पहुंच जाता है। फलों पर पानी के धब्बे से दिखाई पड़ते हैं। ऐसे रोग लगे फल मुलायम होते हैं और उन के ऊपर फफूंद दिखाई पड़ती है। कुछ दिनों के बाद फल गिर जाते हैं और उन फलो पर भी फफूंद रहती है।

रोग फैलने के कारण 

यह रोग ज़मीन से पैदा होता है। पेड़ो के पास ज़मीन में फाइटोफ्थोरा नामक फफूंद को उचित नमी, भोजन व तापमान इस रोग के संक्रमण में सहायक होते है। यह फफूंद गिरे हुए फलों, शाखाओं, पत्तियों या फटे हुए पेड़ के हिस्सों पर भी अपना स्थान बना लेता है। हवा, बारिश, सिंचाई का पानी और कीट भी इस रोग के जीवाणुओं को इस रोग से ग्रसित पेड़ो से स्वस्थ पेड़ो तक पहुँचने में मदद करते है।

गमोसिस की रोकथाम

निम्बू का बाग़ लगाते समय निम्न बातों का ध्यान रखकर इस रोग की रोकथाम बहुत लगभग समाप्त की जा सकती है –

  • ज़मीन का चुनाव ऐसी जगह पर करना चाहिए, जहां पानी इकट्ठा न रहता हो, जिस से ज़मीन में ज्यादा नमी न रह सके जो कि रोग का मुख्य कारण है।
  • रोग रोधी रूट स्टौक खट्टी का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • बड 30 से 40 सेंटीमीटर ऊंची लगानी चाहिए।
  • शुरू में ही जब इस रोग के लक्षण दिखाई दे तुरंत कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का स्प्रे और ड्रिंचिंग दोनों करने चाहिए।
  • सिंचाई करने की योजना इस प्रकार होनी चाहिए कि एक पेड़ के नीचे से पानी दूसरे में न जाए। टपक (ड्रिप) सिंचाई लाभकारी होती है।
  • हर साल पेड़ का मुख्य तना बोर्डो पेस्ट में अलसी का तेल मिलाकर (बोर्डो पेंट) से करीब 1 से डेढ़ मीटर ऊंचाई तक पोतना चाहिए।
  • बाग की सफाई बहुत जरूरी है।
  • सभी रोग लगे फलो व पत्तियां (जो कि ज़मीन पर गिर जाते हैं) को इकट्ठा कर के नष्ट कर देना चाहिए।
  • अगर आपके पेड़ में गमोसिस हो जाता है तो आपको रोग ग्रस्त छाल के उतने ही  हिस्से को खुरच कर साफ़ करें जितने में गोंद निकल रहा हो बाकी को नहीं छेड़े, अधिक से अधिक एक इंच चारों ओर का हिस्सा ले सकते है। इसके बाद इस साफ किए हिस्से पर बोर्डो पेस्ट को ब्रश की सहायता से पेंट कर दे  या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (COC) और अलसी का तेल मिलाकर तने पर लगाए।
  • कटाई छटाई करने से पहले औजारों को कीटाणु मुक्त अवश्य करे।
  • इस रोग को रोकने के लिए जब भी कटिंग करें तो उसके बाद कार्बनडिजम 2 ग्राम प्रति लीटर अथवा COC 3 gram प्रति लीटर का स्प्रे करें। अगर किसी ज्यादा बड़ी शाखा या टहनी को काटा गया है तो उसके कटे हुए भाग पर भी यह पेंट करे।
  • पौधे के तने की चारों ओर मिट्टी इस प्रकार चढ़ाये की पानी उसके तने को न छू सके।
  • यह ध्यान रखें कि बाग़ में पेड़ पर कोई भी मृत, सूखा या बीमार पौधा और कोई खरपतवार नहीं होना चाहिए।
  • Metalaxyl-M दवाई का स्प्रे भी लाभदायक पाया गया है।
  • रिडोमिल गोल्ड भी एक अच्छी दवाई है इसका 2.5 ग्राम  प्रति लीटर ड्रेंचिंग या फिर स्प्रे करें।

यह भी ध्यान रखें 

जब आप पेड़ो के चारों ओर खरपतवार या घास काट रहे हों और जाने अनजाने में आप इसकी छाल को नुकसान पहुँचाते हैं, तो आप गमोसिस को निमंत्रण दे रहे है और आपको जल्द ही गमोसिस उपचार की आवश्यकता हो सकती हैं।

संदर्भ

  1. https://plantix.net/hi/library/plant-diseases/100129/gummosis-of-citrus
  2. https://www.sarita.in/farm-n-food/lemon-plant-disease 
  3. https://hi.mastodoc.com/85796-what-is-gummosis
  4. https://www.cropscience.bayer.com/en/crop-compendium/pests-diseases-weeds/diseases/phytophthora-spp-citrus
  5. अमेजिंग किसान के अनुभवी किसानों द्वारा साझा किये गए अनुभव।
  6. अमेजिंग किसान डेस्क पर लेख 

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