Canker, Leaf Miner and Butterfly

कैंकर, लीफ माइनर और नींबू की तितली

नींबू वर्गीय फलों में मुख्यत: जनवरी-फरवरी में फूल आते हैं। परन्तु नींबू में सितम्बर-अक्टूबर में भी फूल आते हैं। नींबू के फल 3-4 महीनों में उपयोग के लायक हो जाते हैं। अत: फलों की तुड़ाई उनकी उपयोगिता, गुणवत्ता, बाजार मांग आदि के आधार पर सुनिश्चित करना चाहिए। कागज़ी नींबू के पौधे अधिक उपज देने वाले माने गये हैं। निम्बू  के पौधों में अनेक प्रकार के रोग पाए जाते है। जिनमें से निम्न तीन रोगों के बारे में जानकारी और इनकी रोकथाम के उपाय बताये गए है।

कैंकर रोग

यह जीवाणु (बैक्टीरिया) के कारण होने वाली एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है। यह संक्रमण केवल निम्बू परिवार के पौधों में  पत्तियों, फलों और टहनियों पर कई प्रकार के लक्षण पैदा कर सकता है। शुरू में यह रोग पानी की तरह छोटे छोटे गोल पीले धब्बे के रूप में प्रकट होता है जो बाद में  बढ़कर और भूरा, फटा हुआ और सख्त हो जाता है।

अगर इसका सही समय पर इलाज़ न किया जाए तो यह बीमारी गंभीर रूप  धारण कर लेती है और फलस्वरूप पत्तियां झड़ जाती है, टहनियां खराब हो जाती है और इन पर लम्बे और बड़े घाव बन जाते है। जिससे पेड़ की बढ़वार एक दम रूक जाती है। इस बीमारी का नियंत्रण सावधानी पूर्वक निगरानी और शुरुआती पहचान से संभव है।

उपाय 

  • निम्बू के पौधों पर इस रोग का फैलाव बारिश में अत्यधिक होता है। रोग वाली सभी शाखाओं को काट कर अलग कर जला देना चाहिए। शाखाओं के कटे हुए भाग/घाव पर बोर्डो पेस्ट लगाने से इस रोग को फैलने से बचाने में मदद मिलती है।
  • कॉपर आक्सीक्लोराइड 180 ग्राम और स्ट्रेप्टोसाईक्लीन 6 ग्राम 60 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें। जरुरत पड़ने पर दूसरा स्प्रे 30 दिन के अंतराल पर करें।
  • पौधे खरीदते समय यह ध्यान रखे कि पौधे की कोई भी टहनी रोग ग्रस्त नहीं है। नए बगीचे में पौधरोपण के समय बोर्डो मिश्रण का स्प्रे पौधों की सुरक्षा में सहायक होता है।

लीफ माईनर (Leaf  Miner)

यह एक छोटा कीट है और पत्तियों में सुरंग बनाकर रहता है जो टेढ़ी मेढ़ी होती है। यह पत्ती के नीचे एक अंडा देता है जिसमें से एक लार्वा निकलता है जो पत्ती में दब जाता है। वर्षा ऋतु में इसका प्रकोप सबसे अधिक होता है।

  • अगर पौधें कम है तो प्रभावित पत्तियों को हाथ से तोड़कर अलग कर मिट्टी में दबा कर नष्ट कर देना चाहिए।
  • इमिडाक्लोप्रीड (Imidacloprid)17.8 एस एल 0.5 मिली लीटर प्रति लीटर पानी के साथ छिड़काव बहुत असरदार पाया गया।  जहां तक हो सके तो अच्छी कंपनी की ले जैसे बायर की Confidor। 15 दिन बाद दोबारा निरीक्षण करे और आवश्यकता अनुसार एक बार फिर स्प्रे करें।
  • जून-अक्टूबर के बीच जब भी कटाई-छटाई करें तो बोर्डो मिश्रण का स्प्रे अवश्य करें।
  • स्ट्रेप्टोसाइक्लीन 6 ग्राम 60 लीटर पानी में एवं कॉपर ऑक्सीक्लोराइड तीन ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल का स्प्रे बीमारी दिखाई देते ही बीस दिन के अंतराल पर दो स्प्रे करें।

निम्बू की तितली

इसे सूंडी के नाम से भी जानते है और निम्बू की तितली भी। मेरे अपने अनुभव के अनुसार इसका प्रकोप मार्च – अप्रैल और जुलाई – अगस्त में अधिक होता है। अगर आपके बाग़ के आस पास पॉपुलर के पेड़ है तो इसका प्रकोप अधिक होता है और पतझड़ के समय भी होता है। पहले यह काले भूरे रंग की चिड़ियों की बींट की तरह दिखाई पड़ती है जिसका मुख्य भोजन पौधों की कोमल पत्तियां होती है। ध्यान से देखने पर यह सुबह और शाम को पत्तों के ऊपर ही दिख जायेगी।

अगर इसका समय पर इलाज नहीं किया गया तो बड़ी होकर हरे रंग में बदल जाती है और पत्तियों का और अधिक तेजी से सफ़ाया करने लगती है।  इसलिए इसकी रोकथाम जितनी जल्दी हो सके करनी चाहिए।

उपाय 

मेरे निम्बू के पौधों के पास दूसरे किसान ने मेरी मेढ़ से मिलाकर दो ओर पॉपुलर के पेड़ लगाए हुए है इसलिए इसका प्रकोप अक्सर होता रहता है। मैंने इसके लिए तीन दवाइयों का प्रयोग किया जिनमे से दो बहुत सफल रही और उनका अभाव आपके साथ साझा करता हूँ।

  • अगर पौधें कम है तो प्रभावित पत्तियों को हाथ से तोड़कर अलग कर मिट्टी में दबा देना चाहिए।
  • अगर इसका प्रभाव अधिक पौधों पर दिखाई देता है तो निम्न में से किसी भी दवाई का प्रयोग कर सकते है। दवाई छिड़कने के अगले दिन निरीक्षण अवश्य करे।
  • इमिडाक्लोप्रीड (Imidacloprid)17.8 एस एल 0.5 मिली लीटर प्रति लीटर पानी के साथ छिड़काव बहुत असरदार पाया गया।  जहां तक हो सके तो अच्छी कंपनी की ले जैसे बायर की Confidor। 15 दिन बाद दोबारा निरीक्षण करे और आवश्यकता अनुसार एक बार फिर स्प्रे करें।
  • क़्यूनॉलफॉस 25 इ.सी. 1.25 मिली लीटर या एसीफेट 75 डब्लू पी 0.8 ग्राम  या डाईमिथोएट 30 ई. सी. 2 मिली लीटर प्रति लीटर पानी के साथ पत्तियों के नीचे दो बार 15 दिनों के अन्तराल में छिड़काव छिड़काव इसकी रोकथाम में असरकारक होता है।
  • नीम तेल ३ मिली लीटर प्रति लीटर का छिड़काव भी काफी हद तक इसकी रोकथाम में सहायक होता है।

इस बात का ध्यान रखे किसी भी दवाई या नीम तेल में स्टीकर मिलाने से अधिक असरदार होता है।

इस लेख में अधिकतर मूल विचार  टेलीग्राम पर अमेजिंग किसान ग्रुप में दिए गए श्री राज कुमार जैन एवं श्री नावेद शेख के है। अमेजिंग किसान उनके इस सहयोग का आभारी है।