अमरुद में एन्थ्रक्नोज़

अमरुद में एन्थ्रक्नोज़ रोग और उपाय

अगस्त का तीसरा सप्ताह शुरू हो गया है। इस समय अमरुद के पौधों में अक्सर एक रोग पाया जाता है जिसके कारण छोटे पौधों की डालियों के अंत में जो छोटी और कोमल पत्ती होती है वह वह काली पड़-कर कमजोर हो जाती है और फिर गिर जाती है। इसके आस पास धब्बें होने के कारण दूसरी आस पास की पत्तिया भी काली भूरे रंग की हो जाती हैं और ऊपर की टहनियां काली पड़ जाती है। जो नई कलियां है वह फूल बनने से पहले ही कमजोर होकर गिर जाती है। अगर इनका समय पर इलाज न करे तो यह सूख कर गिर जाती है और धीरे धीरे पहले पूरी डाली सूख जाती है। इस रोग के कारण फलों के ऊपर छोटे छोटे काले धब्बें दिखाई पड़ते है और फल अंदर से सड़ जाते हैं। छोटी बिना खिली कलियाँ और फूल भी इस रोग के कारण समय से पहले ही सूख कर गिर जाती है।

यह एक फफूंद रोग है यह वसंत ऋतु में जब मौसम ठंडा और नमीयुक्त होता है, मुख्य रूप से पौधों की  पत्तियों और टहनियों पर हमला करता है। बारिश के मौसम (अगस्त-सितंबर) में इसका प्रकोप सबसे अधिक होता है। जो इस मौसम में लगातार नमी बने रहने के कारण होता है। यहाँ पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि बारिश में खेतों की मिट्टी अधिक गीली के कारण अक्सर कई कई दिन तक पौधों को देखने के लिए किसान खेतों में नहीं जाते और उन्हें इसका पता जब चलता है जब रोग के प्रकोप के कारण पत्ती बिलकुल काली पड़ जाती है। इस अवस्था में इस रोग को एन्थ्रक्नोज़  (Anthracnose) कहते है।

एन्थ्रेक्नोज एक फफूंद रोग है अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए तो मोटी टहनियां भी सूख जाती है। जहां तक हो सके इसका पहले ही कोई उपाय करना चाहिए। अगर एक बार रोग लग गया तो यह फसल को काफी नुकसान पहुँचाता है और फसल खराब हो जाती है जिसके कारण वह बाज़ार में बिकने के लायक नहीं रहती।

रोकथाम के उपाय

इस रोग की रोकथाम का जहां तक हो सके बड़े पौधों पर पहले से उपाय करना चाहिए जिससे फलो पर कोई नुक्सान न हो।

  • परोपिकोनाजोल (Propiconazole) एक  प्रणालीगत (सिस्टमिक) फफूंदनाशी है। इसका 2 मिली लीटर प्रति लीटर पानी मे मिलाकर स्टीकर के साथ स्प्रे करें। अमरूद के पौधों में  25 जून के आस पास इसका स्प्रे करने से यह बरसात के मौसम में इस रोग से बचाव करता है और सर्दियों की फसल की सुरक्षित रहती है।
  • UPL के SAAF (Carbendazim 12% + Mancozeb 63%) जो कि एक संपर्क + प्रणालीगत (Contact + Systemic ) फफूंदनाशी है इसे 30 ग्राम प्रति 15 लीटर टंकी के हिसाब से स्टीकर के साथ स्प्रे करें।
  • अगर आपके पौधें 6 माह से बड़े है तो फफूंदीनाशी के साथ 19:19:19 NPK को 60 ग्राम  (4 gm / liter) प्रति 15 लीटर टंकी के हिसाब से मिलाकर स्प्रे करने से अच्छे परिणाम मिलते है।
  • अगर आपके सर्दी की फसल ले रहे है तो 25 जून के आस पास स्प्रे में 30 ग्राम चिलेटेड जिंक (2 gm / liter) और 60  ग्राम सुहागा (4 gm / liter) प्रति 15 लीटर की टंकी के हिसाब से मिलाकर करने से अच्छी मात्रा में फूल आते है।

जो किसान जैविक बाग़वानी कर रहे है वह इनमें से किसी एक या अधिक का स्प्रे कर सकते है -

  • वेस्ट डेकोम्पोसेर (Waste  Decomposer) का 50% का स्प्रे प्रत्येक सप्ताह करने से भी इस रोग पर काबू पाया जा सकता है।
  • नीम तेल का स्प्रे भी 45 मिली लीटर किसी भी स्टीकर के साथ प्रति 15  लीटर की टंकी के हिसाब से लाभदायक पाया गया है।
  • बोर्डो मिश्रण (0.5%)* या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (0.2%) का स्प्रे भी लाभदायक पाया गया है।

* अगर आप 1 किलो नीला थोथा (CuSO4) और 1  किलो बुझा चूना 50-50 लीटर पानी में लेते है तो इसे 1% का बोर्डो मिश्रण कहेंगे। इसमें क्योंकि नीला थोथा में 25% कॉपर है तो यह  0.25% का बोर्डो मिश्रण होगा।

इस लेख में अधिकतर मूल विचार श्री राज कुमार जैन के है। अमेजिंग किसान उनके इस सहयोग का आभारी है।