बरसात में निम्बू के बाग में की जाने वाली सावधानियां 

बरसात में निम्बू के बाग में की जाने वाली सावधानियां 

जुलाई  माह का पहला सप्ताह बीत चुका है और  मेरे विचार से बारिश सभी जगहों पर अच्छी  तरह से हो गयी होगी। जिनके भी अभी 5 साल  के पेड़ निम्बू या अमरुद के बगीचे हो गए होंगे  बारिश के मौसम में भरपूर पानी मिलने से पौधे एक  दम हरे-भरे हो जाते जो देखने में एक दम स्वस्थ और अच्छे लगते  है। लेकिन इस समय बीमारी ऊपर से भी आती है और ज़मीन से भी। ऊपर  से आने वाली बीमारी को तो हम पहचान लेते है क्योंकि वह हमे दिखाई दे जाती  है। उदाहरण के लिए –

  1. पत्ते  पर इल्ली,  
  2. पत्ते  पर सफ़ेद लाइन   (leaf-minor),
  3. पत्ते  पर खुरदुरे  और भूरे रंग के  धब्बे दिखाई देना,  
  4. पत्तियों  का पीला होना  (yellowish ),
  5. पत्तियों  का सुखना, और 
  6. पत्तो  का कट हो  जाना।

वैसे तो और  भी कई लक्षण है जो  हम आसानी से पहचान  लेते है क्योंकि अब बारिश  के मौसम में कीड़े (insects ), fungus, white-grub और दीमक (Turmite)  के पनपने का सही मौसम है। हम ऊपर से लगने वाली बीमारी को तो देख  लेते है क्योंकि पत्ते से हमे पता चल जाता है कि इस पर कुछ हुआ है। परन्तु  हम नीचे ज़मीन की तरफ ध्यान नहीं दे पाते है कि तने में भी सब सही है या  नहीं। इसमें हम लोग थोड़ी सी लापरवाही करते है ।

इसी संदर्भ में   आज का विषय है कि  हमें बारिश  के मौसम  में क्या-क्या  ध्यान रखना है?

बारिश   की वजह से   5 साल के पेड़ो  या जो उससे  बड़े पेड़ है और जिनका फैलाई अधिक है और उनका छत्रक (Canopy)  बड़ा है और जो घने हो चुके है तो इसके कारण नीचे ज़मीन  में तने के आस पास पानी नहीं पहुंच पाता और वहां की ज़मीन   थोड़ी सुखी रहती है जिस कारण से पेड़ के तने के आस पास जिस  किसान ने भी गोबर का खाद डाला है उससे वहां पर white-grub आने  का ख़तरा रहता है और दीमक भी सूखे स्थान को अधिक पसंद करती है। परन्तु हम  यह समझकर निश्चिंत हो जाते है कि ऊपर से बारिश हो रही है तो पूरी ज़मीन  अच्छी तरह नम हो गई होगी इसलिये हमारे पेड़ भी अच्छे होंगे लेकिन वास्तव में ऐसा  होता नहीं है।  

वास्तव में तने  के पास सूखा रहने  से वहां पर ये सब कीड़े  (Insects) अपना घर बना लेते  है। क्योंकि वहां ऊपर बारिश न तो बारिश का    पानी आता है और न सिचाई का क्योंकि किसान ड्रिप  भी कभी कभी ही चलाता है तो वहां सूखापन ज्यादा  होता है और बाहर खुली ज़मीन की अपेक्षा तने के पास  ज्यादा सूखा रहता है। तो हम को इस बात का ध्यान रखना  है और उपाय भी करते रहना है।    

दीमक या white grub ही  ज्यादा परेशान करते है।   निम्बूवर्गीय पौधों पर फंगस  भी होती है और यह पानी की निकासी  नहीं होने के कारण होती है। यह जड़ में सड़न की वजह से   होती है। इन सबसे बचने के लिए यह उपाय निम्न उपाय कारगर हो सकते है –

  1. Chloropyriphas  20% EC – 500 ml दवा  को 200 लीटर पानी  में घोल कर तने के पास ड्रेंचिंग   करें। यह दवाई   white grub और दीमक  के लिए है। 
  2. Metarhizium Anisopliae – यह  जैविक है  और केवल दीमक, white grub,  fungus सबको खत्म  कर देती है
  3. Copper oxychloride (Blue  Copper) – 3 gm/litre. यह दवाई केवल  कैंकर (Canker) के  लिए और फंगस में भी इसका अच्छा परिणाम है
  4. Plantomycin या Streptocycline – 1 g/10 लीटर पानी में घोल कर दे। यह दवाई केवल जीवाणु संक्रमण (Bacterial Infection)  के लिये है।  इनकी  ड्रेंचिंग   करने से सब बगीचे स्वस्थ होंगे और सुरक्षित  भी रहेंगे।
  5. बोर्डो  पेस्ट का लेप भी 1 मीटर की ऊचाई तक लगा सकते है।

यहां इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है – 

  • दवाई का प्रयोग तब ही करे जब बीमारी  दिखाई दे। 
  • अपने बगीचे की निरंतर देखभाल करे जिससे दवाई का प्रयोग बीमारी दीखते ही किया जा सके और उसे फैलने से रोका जा सके इससे नुकसान होने की संभावना बहुत कम हो जाती है।  
  • जो बीमारी दिखाई दे उसी की दवाई का प्रयोग करना है।

(मूल विचार – श्री नावेद शेख द्वारा हिंदी भाषा में रोमन स्क्रिप्ट में लिखे लेख पर आधारित)